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हेरम्ब चतुर्वेदी का आलेख 'इलाहाबाद में पत्रकारिता का विकास: एक ऐतिहासिक सर्वेक्षण (१८६५-१९४७)'

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अकबर इलाहाबादी का यह शेर काफी मक़बूल है - 'खींचो न कमानों को न तलवार निकालो, जब तोप मुक़ाबिल हो तो अखबार निकालो।' संयोगवश वे जिस इलाहाबाद के थे वहाँ की पत्रकारिता का न केवल प्रांतीय बल्कि राष्ट्रीय स्तर पर महत्वपूर्ण भूमिका रही है। आज़ादी के आन्दोलन में इलाहाबाद की पत्रकारिता ने आगे बढ़ कर स्वतन्त्रता संग्राम को एक नयी दिशा प्रदान कीयहाँ के पत्रकारिताकी अपनी एक अत्यन्त समृद्ध परम्परा रही है। इस परम्परा पर एक विस्तृत नजर डाली है प्रोफ़ेसर हेरम्ब चतुर्वेदी ने। तो आइए पढ़ते हैं प्रोफ़ेसर हेरम्ब चतुर्वेदी का यह आलेख 'इलाहाबाद में पत्रकारिता का विकास : एक ऐतिहासिक सर्वेक्षण।'